Wednesday, February 19, 2025

दिल्ली में सीएम के साथ मंत्री मंडल में ये चेहरे भी होंगे शामिल

 






बुधवार रात दिल्ली में भाजपा ने मुख्यमंत्री के नाम के ऐलान के साथ ही मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले चेहरों का भी ऐलान कर दिया है. आज दिल्ली के रामलीला मैदान में शपथ ग्रहण आयोजित किया गया है. हालांकि अभी कोई डिप्टी सीएम होगा या नहीं इसके लिए कोई अधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है. भाजपा ने बीते मध्य प्रदेश राज्स्न्थान की तरह ही दिल्ली में भी मुख्यमंत्री के चयन से सबको हैरान कर दिया है.

यहां बता दें कि दिल्ली के सीएम पद के लिए महिला और वैश्य फैक्टर को ध्यान में रखा गया है. जबकि मंत्रिमंडल के गठन में पूर्वांचल, पंजाबी, ब्राह्मण और दलित चेहरों को ध्यान में रखा गया है. आलाकमान ने सीएम का नाम तय करने के साथ ही मंत्रियों के नामों का चयन भी कर लिया था. दिल्ली में आज रेखा गुप्ता के साथ ये मंत्री भी शपथ लेंगे.



ये विधायक लेंगे मंत्री पद की शपथ

बीजेपी मंत्रिमंडल में प्रवेश वर्मा के अलावा जो विधायक मंत्री पद की शपथ लेंगे, उनमें आशीष सूद, मनजिंदर सिंह सिरसा, पंकज सिंह, रविंदर सिंह इंद्राज और कपिल मिश्रा का नाम शामिल हैं. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय नेतृत्व ने सभी समीकरणों को ध्यान में रखकर मंत्रिमंडल के नाम तय कर लिए हैं. बता दें दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे प्रवेश वर्मा ने आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल को हराया था. वह शीर्ष पद के प्रबल दावेदारों में से एक थे.

रामलीला मैदान में नई सरकार के भव्य शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां जोरों पर हैं. शपथ ग्रहण समारोह गुरुवार दोपहर में होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी और एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री भी शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत करेंगे. कुछ विशिष्ट मेहमानों समेत लगभग 50,000 लोगों के इस समारोह में भाग लेने की संभावना है.

रेखा गुप्ता होंगी दिल्ली की अगली सीएम, प्रवेश वर्मा डिप्टी सीएम

 



नई दिल्ली: तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए भाजपा ने दिल्ली में अपने मुख्यमंत्री का चेहरा खोल दिया है. भाजपा ने शालीमार बाग से विधायक रेखा गुप्ता को दिल्ली का नया मुख्यमंत्री नियुक्त किया है। 19 जुलाई 1974 को हरियाणा के जुलाना में जन्मी रेखा गुप्ता ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) की अध्यक्ष (1996-1997) के रूप में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। वह दो बार (2007 और 2012) उत्तरी पीतमपुरा वार्ड से पार्षद चुनी गईं। 2025 के विधानसभा चुनाव में, उन्होंने शालीमार बाग सीट से आप की बंदना कुमारी को 29,595 वोटों के अंतर से हराया। उनकी संगठनात्मक क्षमताओं और जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ ने उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए उपयुक्त उम्मीदवार बनाया।

 


यहां बता दें कि दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए 70 में से 48 सीटों पर कब्जा जमाया, जिससे आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया। आप को मात्र 22 सीटों से संतोष करना पड़ा, जबकि कांग्रेस एक बार फिर खाता खोलने में नाकाम रही। इस चुनावी परिणाम ने दिल्ली की राजनीतिक दिशा में महत्वपूर्ण परिवर्तन का संकेत दिया है।

चुनाव की पृष्ठभूमि और प्रमुख मुद्दे

दिल्ली में 5 फरवरी 2025 को मतदान संपन्न हुआ, जिसमें कुल 1.55 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं में से 60.54% ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। चुनाव से पहले, राजधानी में कई महत्वपूर्ण मुद्दे उभरकर सामने आए थे, जिन्होंने मतदाताओं के निर्णय को प्रभावित किया।

स्थानीय शासन और बुनियादी ढांचा

यमुना नदी की सफाई, जो 2020 में आप सरकार का प्रमुख वादा था, अब तक अधूरा रहा। इसके अलावा, शहर की स्वच्छता और कचरा प्रबंधन में कमी के कारण नागरिकों में असंतोष बढ़ा। लोकनीति-सीएसडीएस सर्वेक्षण के अनुसार, 90% से अधिक मतदाता शहर की स्वच्छता से असंतुष्ट थे। वायु प्रदूषण और स्वच्छ पेयजल की कमी भी प्रमुख चिंताएं रहीं, जिन्हें 80% से अधिक मतदाताओं ने महत्वपूर्ण मुद्दों के रूप में चिन्हित किया।

भ्रष्टाचार के आरोप और नेतृत्व की विश्वसनीयता

आप सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप, विशेषकर शराब नीति में अनियमितताएं और मुख्यमंत्री निवास पर अत्यधिक खर्च, जिसे भाजपा ने 'शीश महल' करार दिया, ने जनता के बीच नकारात्मक धारणा बनाई। लोकनीति-सीएसडीएस सर्वेक्षण में लगभग दो-तिहाई उत्तरदाताओं ने आप सरकार को भ्रष्ट माना, जिसमें 28% ने इसे अत्यधिक भ्रष्ट कहा। इन आरोपों ने आप की विश्वसनीयता को गंभीर रूप से प्रभावित किया।

प्रमुख नेताओं की हार और भाजपा की रणनीति

इस चुनाव में आप के कई प्रमुख नेता, जिनमें राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र कुमार जैन, सौरभ भारद्वाज, राखी बिड़ला, और दुर्गेश पाठक शामिल हैं, अपनी सीटों से हार गए। भाजपा ने इन नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलताओं को प्रमुख मुद्दा बनाकर आक्रामक प्रचार किया, जिसका सकारात्मक परिणाम उन्हें मिला।

प्रवेश वर्मा: उपमुख्यमंत्री के रूप में

भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा को उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया गया है। उनका राजनीतिक अनुभव और प्रशासनिक कौशल रेखा गुप्ता के साथ मिलकर दिल्ली के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

कांग्रेस की स्थिति

कांग्रेस पार्टी लगातार तीसरी बार दिल्ली विधानसभा में खाता खोलने में विफल रही। हालांकि, उसका वोट प्रतिशत पिछले चुनावों की तुलना में थोड़ा बढ़ा, लेकिन यह सीटों में तब्दील नहीं हो सका। पार्टी के 70 में से 67 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई, जो पार्टी के लिए गंभीर चिंतन का विषय है।

भविष्य की चुनौतियाँ और संभावनाएँ

भाजपा की नई सरकार के सामने कई चुनौतियाँ हैं, जिनमें यमुना की सफाई, स्वच्छता, वायु प्रदूषण, और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता प्रमुख हैं। भाजपा ने चुनाव प्रचार के दौरान इन मुद्दों के समाधान का वादा किया था, और अब जनता की उम्मीदें उनसे जुड़ी हैं। इसके अलावा, आप और कांग्रेस जैसी विपक्षी पार्टियाँ अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार कर सकती हैं, जिससे आगामी राजनीतिक परिदृश्य और भी दिलचस्प हो सकता है।

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के परिणाम ने राजधानी की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ा है। भाजपा की निर्णायक जीत, आप की प्रमुख नेताओं की हार, और कांग्रेस की निरंतर विफलता ने यह स्पष्ट किया है कि दिल्ली के मतदाता परिवर्तन चाहते थे। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई सरकार जनता की अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरती है और दिल्ली के विकास में किस प्रकार योगदान देती है।

Election Commissioner नियुक्ति मामले की सुनवाई टली, जानिए अब क्या होगा


आज सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयुक्त नियुक्ति (
Chief Election Commissioner) कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई टल गई है. समय की कमी के चलते इस मामले में  सुनवाई नहीं हो सकी. 2 जजों की बेंच की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस सूर्य कांत ने मामले पर जल्द सुनवाई का आश्वासन दिया है. लेकिन अभी तारीख नहीं दी गयी है, जिस कारण इस मामले के लंबा खिंचने की संभावना जताई जा रही है.

यहां बता दें कि इन याचिकाओं में 2023 में आए सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के फैसले का हवाला दिया गया है. उस फैसले में कोर्ट ने चुनाव आयुक्त का चयन करने वाली कमेटी में चीफ जस्टिस, पीएम और नेता विपक्ष को रखने का आदेश दिया था. लेकिन सरकार ने नया कानून पास करते हुए इस कमेटी में चीफ जस्टिस को न रख कर पीएम की तरफ से नामित मंत्री को जगह दी.

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स, लोक प्रहरी और जया ठाकुर समेत कई याचिकाकर्ताओं ने नए कानून को चुनौती दी है. इन याचिकाकर्ताओं ने नए कानून के आधार पर हुई नए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त विवेक जोशी की नियुक्ति को भी गलत कहा है.



याचिकाकर्ता जया ठाकुर की तरफ से पेश एक वकील ने मामले को महत्वपूर्ण बताते हुए आज ही सुनवाई की मांग की. इस पर जस्टिस सूर्य कांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में दाखिल होने वाली हर याचिका महत्वपूर्ण होती है. वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि इस सुनवाई में कम से कम एक घंटा लगेगा. इस पर बेंच ने कहा कि यह सुनवाई आज संभव नहीं हो सकती. आपको जल्दी सुनवाई की अगली तारीख दे दी जाएगी.

नए कानून में चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया को चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से हटा दिया गया है, जिस पर कांग्रेस समेत सभी विपक्षी पार्टियों ने आपत्ति जताई थी. यही नहीं 17 फरवरी को चुनाव आयुक्त के चयन समिति की बैठक में विपक्ष नेता राहुल गांधी ने अपना विरोध भी दर्ज कर दिया था, लेकिन 3 सदस्यों वाली समिति में दो एक से ज्ञानेश कुमार को नया चुनाव आयुक्त नियुक्त कर दिया गया है. समिति में प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और विपक्ष नेता राहुल गांधी शामिल हैं.

 


Wednesday, February 14, 2024

किसान आन्दोलन 2.0: बढ़ी मोदी सरकार की बेचैनी

 




नई दिल्ली: 2024 लोकसभा चुनावों से ऐन पहले एक बार देश में किसान आन्दोलन खड़ा हो गया है। जिसके निशाने पर एक बार फिर मोदी सरकार है, किसानों का आरोप है कि दो साल पहले जो आश्वासन मोदी सरकार ने देकर तेरह महीने तक चले किसान आन्दोलन को खत्म कराया था,उसमें से एक भी वादा पूरा नहीं  किया है अभी तक।पंजाब और हरियाणा के लाखों किसान संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर दिल्ली कूच कर चुके हैं, जिसमें हरियाणा पंजाब के शम्भु बॉर्डर पर किसानों और हरियाणा पुलिस के बीच तीखी झड़प चल रही है। किसानों को रोकने के लिए पुलिस आंसू गैस के साथ ही रबर बुलेट का इस्तेमाल कर रही है, वहीँ किसान किसी भी तरह दिल्ली न पहुंचे उसके लिए पहले से इस बार बैरीकेडिंग-कंटीले तारों के साथ इस तरह बंदोबस्त किया जैसे ये कहीं युद्ध का नजारा हो। विपक्षी राजनीतिक दलों ने किसानों को अपना समर्थन दिया है।  बीते दो दिनों में कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा के नेतृत्व में किसानों से सरकार की बात बे नतीजा रही है, जबकि किसानों पर हिंसा का इस्तेमाल करने पर देश भर के अन्य किसान संगठन भड़क थे हैं और उन्होंने 15 फरवरी को पंजाब में रेल चक्का जाम और हाइवे टोल फ्री करने का ऐलान कर दिया है। कई किसान संगठनों ने पहले से ही 16 फरवरी को भारत बंद का आह्वान किया है। जिसको लेकर सरकार खासा दबाब में है। 




सबसे पहले जानते हैं कि किसानों की मांगें क्या है:

1. सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य देने की गारंटी के लिए एक राष्ट्रीय कानून बनाया जाए।

2. सरकार देश भर के किसानों का सारा कर्ज माफ कर दे। 3. भूमि अधिग्रहण काननों 2013 को लागू किया जाए। 4. अक्टूबर 2021 में लखीमपुर खीरी में किसानों की हत्या करने वाले अपराधियों को कठोर से कठोर सजा मिले। 5. भारत W.T.O से अलग हो जाए और W.T.O के साथ होने वाले सभी free trade agreement रद्द हों। 6. किसानों और मजदूरों के लिए सरकार एक नई पेंशन स्कीम शुरू करे जिसके तहत सभी किसानों को 60 साल की उम्र के बाद 10,000 रुपए हर महीने पेंशन के रूप में मिलें। 7. 2020 और 2021 के किसान आंदोलन मे मृतक किसानों के परिवारों को मुआवजा मिले और परिवार के किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिले। बिजली संशोधन विधेयक 2020 रद्द हो। 8. मनरेगा मजदूरों को 200 दिन मजदूरी की गारंटी और दैनिक मजदूरी 700 रुपए हो। 9. बिजली संशोधन विधेयक 2020 को रद्द किया जाए। 10. नकली बीज, कीटनाशक और उर्वरक बनाने वाली कम्पनियों पर सरकार सख्त कार्यवाही करे। 11. मिर्च और हल्दी जैसे मसालों के लिए राष्ट्रीय आयोग बनाया जाए। 12. जल, जंगल और जमीन पर मूल निवासी और आदिवासी के अधिकार सुरक्षित हों।


मोदी सरकार नहीं दिख रही गंभीर

फिलहाल जो मोदी सरकार का रवैया है उससे लग नहीं रहा कि वो किसानों की इन मांगों पर गंभीर है क्यूंकि किसान पिछले दो सालों से इस मांग को दोहरा रहे हैं। यही नहीं 13 फरवरी को दिल्ली कूच का आह्वान था किसानों उसके बाद भी अगर मोदी सरकार बेफिक्री दिखाती रही तो इसमें सीधा नजर आ रहा है कि जो पीएम मोदी किसानों के हितैषी होने के भाषण देते हैं वो जमीन पर उतने गंभीर नहीं है। अभी पूर्व प्रधान मंत्री चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न का ऐलान किए एक हफ्ता भी नहीं बीता तो वहीँ आज किसानों पर आंसू गैस के गोले और रबर बुलेट चलाई जा रही है, जिसकी आलोचना सभी किसान संगठन और विपक्ष कर रहा है। दो साल पहले भी किसान दिल्ली की सीमाओं पर 13 महीने तक कृषि कानूनों के खिलाफ डटे रहे, राजनीतिक नुकसान होता देख पीएम मोदी ने उन कानूनों को वापस लेने की बात कही, लेकिन किसानों की जो मांगे थीं वो यथावत रहीं।

विपक्ष को मिला मुद्दा

वहीँ किसान आन्दोलन के समर्थन में मुख्य विपक्षी कांग्रेस सहित सभी पार्टियां आ गयीं हैं और मोदी सरकार के रवैये की तीखी आलोचना की है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने फोन पर घायल किसानों का हाल भी जाना। जबकि सपा प्रमुख अखिलेश यादव, अरविन्द केजरीवाल, ममता बनर्जी ने भी केंद्र सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई है।

क्या होगा भविष्य

इस बार किसानों का जो रुख दिख रहा है वो पूरी तरह आर-पार की लड़ाई का दिख रहा है, उधर पश्चमी उत्तर प्रदेश के किसान और टिकैत गुट के राकेश टिकैत ने भी कहा है कि अगर किसानों को परेशान किया गया तो दिल्ली दूर नहीं है। लोकसभा चुनाव से पहले इंडिया गठबंधन से निपटने के प्लान के बीच किसान आन्दोलन ने मोदी सरकार और उसके रणनीतिकारों को उलझा दिया है। अगर ये आन्दोलन अगर तेज हुआ तो चुनावी पिच पर मोदी सरकार को भारी नुकसान का दावा किया जा रहा है, क्यूंकि आन्दोलन को कुचलने के लिए जिस पर इस बार बल प्रयोग किया जा रहा है उससे देश भर के किसान संगठन एकजुट हो रहे हैं। उधर विपक्षी दल कांग्रेस ने भी केंद्र में सत्ता में आने पर एमएसपी की कानूनी गारंटी के साथ ही स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू करने की बात कही है। ये मामला इस वजह से और तीखा होता जा रहा है मोदी सरकार के लिए। अभी हाल ही में बिहार में जिस तरह की राजनीतिक उठापटक हुई और कई राज्यों में विपक्षी नेता सीधे मोर्चा लेते दिख रहे हैं तो इस बार 2014 और 2019 जैसे आसान राह बनती नजर नहीं आ रही है। अगला एक सप्ताह न सिर्फ किसान आन्दोलन बल्कि देश की राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण होगा।




मुरादाबाद में SIR 2026 में 3.87 लाख वोट कटे: विधानसभा वार डिटेल, अपना नाम कैसे चेक करें और नाम कटने पर क्या करें

  उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन ( SIR) 2026 के दौरान मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं। मुरादाबाद जिले में कुल 3.87 ला...